देहरादून: चार साल बाद पट्टेदारों-कब्जाधारकों को राहत, हजारों लोगों को मिलेगा लाभ

देहरादून। उत्तराखंड में पिछले चार साल से भूमिधरी अधिकार मिलने का इंतजार कर रहे पट्टेदारों और कब्जाधारकों के लिए राहत की खबर है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने वर्ग-तीन और वर्ग-चार की भूमि के पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के इस फैसले से नैनीताल जिले के लालकुआं और देहरादून के परगना जौनसार-बावर क्षेत्र में हजारों लोगों को लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
राजस्व विभाग के अनुसार, भूमि की अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित हैं। वर्ग-तीन यानी असामी पट्टाधारक के तहत ऐसी भूमि आती है, जिस पर लोग बंदोबस्ती से पहले से काबिज हैं और खतौनियों में उनके नाम दर्ज हैं। वहीं वर्ग-चार में सीलिंग की वह भूमि शामिल है, जिसका पट्टा लोगों को दिया गया है।
कैबिनेट ने नगर पंचायत लालकुआं, नैनीताल में संबंधित पट्टेदारों और कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार देने तथा परगना जौनसार-बावर, देहरादून में वर्ग-चार की भूमि के विनियमितीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
एक साल तक 2004 के सर्किल रेट का लाभ
सरकार के फैसले के अनुसार संबंधित भूमि का विनियमितीकरण एक वर्ष तक वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद विनियमितीकरण की प्रक्रिया प्रचलित सर्किल रेट के अनुसार होगी। इससे पात्र लोगों को पुराने सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित राशि जमा कर भूमिधरी अधिकार प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
सचिव राजस्व एसएन पांडेय के अनुसार, संबंधित लोगों को एक वर्ष के भीतर वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित धनराशि जमा करनी होगी। एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार राशि जमा करनी होगी। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
2016 से 2022 तक चली थी प्रक्रिया
भूमिधरी अधिकार देने की प्रक्रिया इससे पहले वर्ष 2016 से 2022 तक चली थी। इस दौरान कई पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार दिए गए, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे दोबारा आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
भूमि कानूनों में भी संशोधन को मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली, 1952) में संशोधन को भी मंजूरी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, एक्ट में किए गए संशोधनों को नियमावली में शामिल किया गया है। इससे भूमिधरी अधिकार और भूमि से जुड़े मामलों की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी। कैबिनेट के इस फैसले को लंबे समय से भूमिधरी अधिकार का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

















