आज होगा पूर्णिमा श्राद्ध, क्यों किया जाता है पूर्णिमा तिथि पर ऋषि तर्पण

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Aaj Ka Panchang 26 September 2026: भाद्रपद पूर्णिमा को उन पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ हो. 26 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा है. इसके बाद अगले दिन से अश्विन मास प्रारंभ होगा. जिसमें 15 दिन पितृ पक्ष के होंगे और फिर शारदीय नवरात्र प्रारंभ होंगी. उससे पहले पितृ पक्ष के दौरान पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण, पिंडदान किया जाएगा. साथ ही पंचक का तीसरा दिन होगा. वहीं सुबह 10:46 बजे तक भद्रा काल रहेगा. देखें 26 सितंबर का पूरा पंचांग. 

भाद्रपद पूर्णिमा का इसलिए खास महत्व है कि इस दिन उन लोगों का तर्पण और पिंड अर्पित किया जाता है जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि पर हुई है। और इसके साथ ही पूर्णिमा के दिन श्रषि तर्पण किया जाता है। ऋषि तर्पण में अगस्त मुनि का तर्पण उनकी पत्नी लोपामुद्रा के साथ विशेष रूप करने का विधान है। इनके साथ वशिष्ठ, जमदग्नि, कश्यप, भरद्वाज, विश्वास और गौतम श्रषि के नाम से भी जल तर्पण किया जाता है।

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पितृपक्ष में सबसे पहले दिन ऋषि तर्पण क्यों किया जाता है इसकी एक बहुत ही सुंदर कथा है जिसे ध्यान पूर्वक सुनना और समझना चाहिए। कथा के अनुसार एक समय में दो असुर भाई हुए आतापी और वातापी। वृत्रासुर के युद्ध में मारे जाने के बाद दोनों असुरों ने ऋषि मुनियों को मारना शुरू किया और इसके लिए वे अपनी मायावी शक्ति का प्रयोग करते थे। आतापी के पास ऐसी दिव्य मायावी शक्ति थी जिससे वह मरे हुए व्यक्ति का नाम लेकर उसे पुनः जीवित कर सकता था। जबकि वातापी इच्छा के अनुसार रूप बदल सकता था।

दोनों भाई दिन भर समुद्र में छिपकर रहते और रात के समय ऋषियों को मारने के लिए उन्हें भोजन पर आमंत्रित करते। छोटा भाई खाने की वस्तु बन जाता था। फिर आतापी ऋषियों को वह भोजन दे देता था। फिर जब ऋषि भोजन कर लेते तो वह अपने भाई वातापी को पुकारता और वह ऋषि का पेट फाड़कर जीवित वापस आ जाता। इनके अंत का कोई तरीका नहीं मिल रहा था। तब देवताओं और ऋषियों ने अगस्त मुनि कि शरण ली। अगस्त मुनि बड़े ही ज्ञानी और तेजस्वी ऋषि थे।

एक दिन अगस्त मुनि आतप और वातप असुर के अतिथि बनकर पहुंचे। वातप फिर से भोजन बन गया और ऋषि के पेट में पहुंच गया। लेकिन अगस्त मुनि सब कुछ पहले से ही जानते थे। उन्होंने वातप को पुकारा लेकिन वह बाहर नहीं आ पाया। उन्होंने अपने योग बल वातप को पचा लिया और आतप घबराकर समुद्र में छिप गया। तब देवताओं के अनुरोध पर अगस्त मुनि ने समुद्र का जल अंजुली में लेकर पी गए। जब असुर आतप भय से कांपता हुआ अगस्त मुनि पर हमला करने दौड़ा लेकिन अगस्त मुनि ने उसे एक क्षण में ही अपने तपोबल से भस्म कर दिया।

जिस दिन अगस्त मुनि ने समुद्र का जल पीकर आतप और वातप का अंत किया था वह तिथि थी भाद्रमास की पूर्णिमा तिथि। देवताओं के अनुरोध पर और समुद्र में जल के अभाव में तड़पते जीवों पर दया करके अगस्त मुनि ने वापस से समुद्र का जल छोड़ दिया। इसके बाद से देवताओं ने कहा कि अब से पितृ पक्ष के पहले दिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि पर अगस्त मुनि का तर्पण उनकी पत्नी लोपामुद्रा के साथ करना होगा। साथ ही अन्य तेजस्वी ऋषियों का भी तर्पण करना होगा। इससे पितरों को जल और अन्न की प्राप्ति होगी और उनको तृप्ति मिलेगी। इसलिए पितृपक्ष में सबसे पहले दिन अगस्त मुनि का तर्पण करने का विधान है।

आज की तिथि – रात 10:18 बजे तक भाद्रपद पूर्णिमा रहेगी और इसके बाद अश्विन मास के कृष्‍ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी. 

आज का वार – शनिवार. 

आज के व्रत-त्‍योहार – पूर्णिमा व्रत, पितृ पक्ष प्रारंभ. 

आज के ग्रह गोचर – द्रिक पंचांग के अनुसार, दोपहर 12:41 बजे बुध का तुला में गोचर होगा. सुबह 05:32 बजे चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे. 

आज का नक्षत्र – सुबह 11:32 बजे तक पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र रहेगा और उसके बाद उत्‍तरभाद्रपदा नक्षत्र प्रारंभ होगा. 

आज के योग – दोपहर 01:17 बजे तक गण्‍ड योग रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है. इसके बाद वृद्धि योग प्रारंभ होगा. 

आज भद्रा काल – 25 सितंबर की रात 11:06 से भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो कि 26 सितंबर की सुबह 10:46 तक रहेगा. 

सूर्य व चंद्रमा का समय 

सूर्योदय – सुबह 06:20 बजे 
सूर्यास्त – शाम 06:15 बजे 
चन्द्रोदय – शाम 06:00 बजे 
चन्द्रास्त – 27 सितंबर की सुबह 06:39 बजे 
(शहर के हिसाब से उदय व अस्त के समय में कुछ मिनट या सेकेंड का अंतर देखा जा सकता है)

आज के शुभ काल

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:44 बजे से 05:32 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक
अमृत काल – None

आज के अशुभ काल

राहुकाल – सुबह 09:19 बजे से 10:48 बजे तक
यम गण्ड – दोपहर 01:47 बजे से 03:17 बजे तक
कुलिक – सुबह 06:20 बजे से 07:50 बजे तक
दुर्मुहूर्त – सुबह 07:56 बजे से 08:43 बजे तक
वर्ज्यम् – रात 08:58 बजे से 10:32 बजे तक

करण

विष्टि – सुबह 10:47 बजे तक
बव – सुबह 10:47 बजे से रात 10:19 बजे तक
बालव – रात 10:19 बजे से 27 सितंबर की सुबह 09:42 बजे तक

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।