गुरु-शिष्य परंपरा और पहाड़ी विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल, 6 जून को होगा खरखीना महोत्सव

नई दिल्ली। पुरानी यादों को फिर से जीवंत करने, गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने और पहाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में खरखीना महोत्सव 2027 एक नई और सार्थक पहल के रूप में सामने आया है। रविवार को दिल्ली के गढ़वाल भवन में आयोजित प्रथम बैठक में महोत्सव की रूपरेखा तय की गई। ढोल-दमाऊ और मशकबीन की पारंपरिक धुनों के बीच हुई बैठक में सर्वसम्मति से 6 जून 2027 को खरखीना महोत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

आयोजकों ने महोत्सव को महज सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों और नई पीढ़ी को जोड़ने वाले सामाजिक एवं सांस्कृतिक मंच के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। महोत्सव का आयोजन राजकीय इंटर कॉलेज खरखीना, पोस्ट नैकना (मासी), तहसील भिकियासैंण, जिला अल्मोड़ा में किया जाएगा।

पारदर्शिता के लिए खुलेगा अलग बैंक खाता
बैठक में महोत्सव के संचालन में पारदर्शिता और व्यवस्थित वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अलग बैंक खाता खोलने का निर्णय लिया गया। इससे महोत्सव से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में सभी सदस्यों के बीच स्पष्टता और पारदर्शिता बनी रहेगी।इसके साथ ही सभी पूर्व विद्यार्थियों एवं अध्यापकों की नाम, व्यवसाय, फोटो और वर्तमान पते सहित विस्तृत सूची तैयार कर एक बुकलेट प्रकाशित करने का निर्णय भी लिया गया। इसका उद्देश्य पुराने साथियों और गुरुजनों के बीच संपर्क को मजबूत करना तथा भविष्य में सामाजिक कार्यों के लिए एक साझा मंच तैयार करना है।
भूमिया पूजन से सांस्कृतिक कार्यक्रम तक होंगे आयोजन
महोत्सव में भूमिया पूजन, विशाल भंडारा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, फैशन शो और पूर्व अध्यापकों का सम्मान समारोह प्रमुख आकर्षण होंगे। वहीं जनवरी और फरवरी में खेलकूद एवं सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को मुख्य महोत्सव के मंच पर सम्मानित किया जाएगा। आयोजन को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए नेत्र जांच सहित विभिन्न स्वास्थ्य जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई गई है। सदस्यों के सुझाव और आवश्यकता के आधार पर महोत्सव में अन्य कार्यक्रम भी शामिल किए जाएंगे।
मजबूत हुई आयोजन समिति
महोत्सव के सफल संचालन के लिए बैठक में कार्यकारिणी का गठन किया गया। मुख्य संरक्षक डॉ. सूरज सिंह नेगी एवं तारा दत्त जोशी, मुख्य संयोजक मुकेश शर्मा, सह संयोजक जोगदा पहाड़ी, अध्यक्ष बंशी धर शर्मा, महासचिव प्रताप घुगत्याल और उपाध्यक्ष मोहित सिंह बनाए गए। सचिव की जिम्मेदारी पंकज घुगत्याल एवं ललित रावत को, जबकि कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सुरेंद्र सिंह, विशाल चंद्र एवं विजय रावत को दी गई। सांस्कृतिक सचिव गिरीश जीना तथा कार्यक्रम प्रभारी बाला दत्त जोशी, हिम्मत पाल एवं भुवन चंद्र होंगे।
सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मनीष रावत, दिनकर ठाकुर एवं सूरज घुगत्याल को दी गई। सलाहकार मंडल में लीलाधर शर्मा, लोकेश शर्मा, मोहन नेगी, हीरा सिंह, नंद किशोर शर्मा, यशपाल शर्मा, मोहन जोशी, डीआईजी बालम सिंह बिष्ट एवं पीताम्बर दत्त शर्मा शामिल हैं।
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक विरासत का सफर
खरखीना महोत्सव की सबसे खास बात इसका उद्देश्य है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक विरासत का सफर की भावना के साथ आयोजित होने वाला यह महोत्सव पुराने विद्यार्थियों और शिक्षकों को फिर एक मंच पर लाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल नाच-गाने और उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुरानी यादों, गुरुजनों के सम्मान, सामाजिक सरोकारों और पहाड़ी संस्कृति को सहेजने का माध्यम बनेगा। बैठक में उपस्थित सदस्यों में महोत्सव को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। सभी ने खरखीना महोत्सव 2027 को भव्य, यादगार और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी आयोजन बनाने का संकल्प लिया।
बैठक में गुरु जी टीका सिंह मेहता, लोकेश शर्मा, यशपाल शर्मा, नंद किशोर शर्मा, प्रताप घुगत्याल, जोगदा पहाड़ी, बाला दत्त जोशी, मुकेश शर्मा, बंशी धर शर्मा, भुवन चंद्र, नीमा आर्य, प्रियांशु सिंह, हर्ष सिंह, मोहित सिंह, मनीष रावत, कृष्ण नंद जोशी, रोशन धारकिया, नीलम जोशी, बसंती बिष्ट, शुभम सिंह, विशाल चंद्र एवं रोहित सिंह सहित 22 सदस्य मौजूद रहे।















