तुम दोस्त हो मेरे याद रखना…

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तुम दोस्त हो मेरे याद रखना ,
तुम्हारे जैसा ही मेरा भी है सपना ।
बड़ी बड़ी नींद छोटे छोटे ख्वाब ,
दबंग हमेशा बना रहे रुआब।
तुम ही तो हो जो सदा पोंछता है मेरे आँसू ,
तुम ही तो हो जो देता है दुश्मन को जवाब धांँसू ।
तुम ही जानते हो मेरे सारे राज ,
तुमने ही सँवारे हैं मेरे सारे काज।
तुमने ही तो बचाया है पथभ्रष्ट होने से मुझे ,
भय लगता है मित्र तुम्हें खोने से मुझे ।
भूल मत जाना अपना याराना,
चाहे
फैसबुक पे इंस्टा पे ट्विटर पर जाना ।
मिलूँगी मैं सदा इसी अंदाज में ,
खुश रहूँगी मिलकर तेरे बाहुपाश में ।
कागज की कश्ती नहीं है अपना रिश्ता ,
याद रखना
एक दूजे के लिए हम ही हैं फ़रिश्ता।। डॉ संज्ञा प्रगाथ

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।