उत्तराखंड: 18 की उम्र में सेना में भर्ती हो गये थे शहीद बृजेश, जिगर का टुकड़ा खोने पर गश खाकर बेहोश हुई मां

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Pahad Prabhat News Ranikhet: उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता है। यहां के वीर जवान देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से कभी पीछे नहीं हटते है। कुमाऊं रेजीमेंट के जाबांजों के किस्सों से हर कोई वाकिफ है। देर रात कुमाऊं रेजीमेंट के जवान बृजेश सिंह रौतेला उम्र 23 के शहीद होने की खबर ने हर किसी को झकझोर दिया। शहीद होने की खबर मिलते ही उसके पैतृक गांव सरना गमगीन हो उठा। बेटे की शहादत के बाबद परिजनों में कोहराम मच गया। बृजेश की मां बेटे को खोने से गश खाकर गिर पड़ी।

ऐसे नहीं बन जा कोई बृजेेश

बचपन से ही फौजी पिता के जाबांज पुत्र बृजेश सिंह में सैनिक बन देशसेवा करना चाहता था। मात्र 17 वर्ष चार माह की उम्र में वहा रानीखेत के ऐतिहासिक सोमनाथ मैदान में सेना भर्ती रैली शामिल हो गया। देश सेवा के जज्बे ने उसकी दौड़ पूरी कर ली, लेकिन तभी उम्र कम होने पर उसे सेना के अधिकारियों ने उसे अगली बार प्रयास करने का दिलासा देकर वापस भेज दिया।

कमांडो बनाना था सपना

कम उम्र ने बृजेश का तोड़ा तो उसने और ज्यादा तैयारी शुरू कर दी। इसके बाद फिर मैदान मेें उतरने पर उसे मैदान मार लिया। मात्र 18 वर्ष की उम्र बृजेश सिंह भारतीय सेना का अभिन्न अंग बन गया। सेना मेडल प्राप्त पिता दलवीर सिंह ने बताया कि बृजेश को बचपन से ही सेना में कमांडो बनने का शौक था। छोटी सी उम्र में वह देश के लिए शहीद हो गया।

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बेहाश हुई मां

वीर बेटे की शहादत पर मां पुष्पा देवी, बड़े भाई अमित, छोटी बहन कल्पना का रो रो कर बुरा हाल है। आज मौसम खराब होने के कारण विमान उड़ान नहीं भर सका है। ऐसे में पार्थिक शरीर शुक्रवार तक पहुंचने की उम्मीद है। बेटे को खोने से मां रोती बिलखती बेहोश हो गई। होश आता तो जांबाज पुत्र के किस्से याद कर फिर गश खाकर गिर पड़ती।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।