उत्तराखंडः अब Amazon से खरीदें पहाड़ी झंगोरा, खूबियों से भरा है खजाना

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Dehradun News: आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में सचिवालय में उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों के अम्ब्रेला ब्रांड “हाउस ऑफ हिमालयाज” के उत्पाद पहाड़ी झंगोरा को E-Commerce वेबसाइट Amazon के माध्यम से क्रय किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड का शुभारंभ किया गया था।

उन्होंने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज के द्वारा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पाद आमजन के लिए आसानी से उपलब्ध होंगे और उत्तराखण्ड से बाहर रह रहे लोग भी इन उत्पादों को सुलभता से खरीद सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ साथ राज्य के नागरिकों को आजीविका के नए अवसर भी उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।

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झंगोरा एक ऐसा पौष्टिक आहार है, जिसे पहाड़ों में खूब पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, इसके अलग-अलग व्यंजनों को बनाकर खाया जाता है। इससे छंछिया, खीर, भात आदि बनता है। इसे बाकी जगहों में कई नामों से जाना जाता है और अलग तरीके से बनाया भी जाता है। अपने औषधीय गुणों के कारण इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं,

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झंगोरा को इंडियन बार्नयार्ड मिलेट के नाम से भी जाना जाता है। यह खास तौर पर उत्तराखंड राज्य में होता है। इसे सबसे पौष्टिक आहार माना जाता है। इसके छोटे-छोटे गोल बीज होते हैं, जिसे वर्त के दौरान फलाहार के रूप में भी खाया जाता है। इसे अलग-अलग जगहों पर अलग नामों से जाना जाता है जैसे तमिल में कुथिरवली, कन्नड़ में उधलु, बंगाली में श्यामक आदि। इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन आदि पौष्टिक तत्वों की प्रचुर मात्रा पाई जाती है।

पहाड़ क्षेत्र में झंगोरे को खूब खाया जाता है। झंगोरे की खीर, भात, छंछिया आदि पहाड़ के पारंपरिक लोकप्रिय व्यंजनों में शुमार है। इसका वर्णन ग्रंथों में भी किया गया है। झंगोरे को पहले गरीबों का खाना कहा जाता था, मगर धीरे-धीरे इसकी उपयोगिता और स्वास्थ्य लाभों को देखते हुए इसे खूब उगाया जाता है और खाया-खिलाया जाता है। पीलिया जैसे रोगों में भी इसे खाने की सलाह दी जाती है। इतना ही नहीं, पहाड़ की शादियों में इसे तोहफे के रूप में भेंट किया जाता है।

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झंगोरा में अच्छी मात्रा में आयरन पाया जाता है। बाकी अन्य मिलेट्स और सीरियल ग्रेन्स के मुताबिक 100 ग्राम में कच्चे झंगोरे में लगभग 18.6mg आयरन होता है। जिन लोगों में खून की कमी होती है, उनके लिए इसका सेवन करना वरदान हो सकता है। वहीं, जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान क्रैम्प्स और अधिक खून आता हो, उन्हें भी इसे अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।

झंगोरे डायटरी फाइबर का उच्च स्रोत है, इसमें सॉल्युबल और इंसॉल्युबल दोनों फ्रैक्शन होते हैं। इस वजह से पेट की समस्याओं सहित पाचन शक्ति में भी सुधार करता है। इसमें हाई फाइबर कंटेंट कब्ज, मरोड़, एसिडिटी की समस्या को कम करने में सहायक है। साथ ही इसके सेवन से पेट फूलने की समस्या में भी राहत मिलती है।

इसमें बायोएक्टिव कंपाउंड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो आपका वजन निंयत्रित करने में सहायक है। हाई कंटेंट फाइबर और प्रोटीन होने की वजह से आपको लगता है कि आपका पेट भरा हुआ है, इस वजह से आप एक्सेसिव ईटिंग नहीं कर पाती। कैलोरी जो वजन बढ़ने का कारण है, उसकी मात्रा भी इसमें बहुत कम होती है। झंगोरे का सेवन करने बाद आप ऊर्जावान भी महसूस करती हैं।

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झंगोरे में कार्बोहाइड्रेट कंटेंट कम होता है, जिसकी वजह से यह इसे लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड की श्रेणी में रखता है। यह अधिक मात्रा में रेजिसटेंस स्टार्च के निर्माण की सुविधा प्रदान करता है, जिस वजह से यह ब्लड शुगर और दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है।

पेट की समस्या से परेशान लोगों के लिए ग्लूटेन फ्री डाइट जरूरी होती है। यह उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जो गेहूं की एलर्जी, सीबीएस से सीलिएक डिजीज और नॉन-सीलिएक ग्लूटेन सेंसिटिविटी से पीड़ित हैं। अन्य ग्रेन्स के मुकाबले इसमें ग्लूटेन नहीं होता। कहा तो यह भी जाता है कि इसके स्वाद और लाभों को देखते हुए इसे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को झंगोरा बहुत पसंद था। आज यह पहाड़ी अनाज कई बड़े रेस्तरां में बहुत कीमती दामों में मिलता है।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।