उत्तराखंड: पति के अंतिम संस्कार को नहीं आये कोई रिश्तेदार तो ईओ त्रिपाठी ने ऐसे दी मानवता की मिसाल

रामनगर-कहते है ना जिसका कोई नहीं होता उसका भगवान होता है। कोरोना काल में खुद जिंदगी की जंग जीतकर आये रामनगर पालिका के ईओ भरत त्रिपाठी ने आते ही एक नई मिसाल पेश की जिससे समाज में उनका कद और बढ़ गया। अब लोग उनके इस कार्य की प्रशंसा कर रहे है। दरअसल रामनगर में एक कोरोना मरीज की मौत हो गई। अंतिम संस्कार के लिए मृतक की पत्नी ने कई रिश्तेदारों को फोन किये लेकिन कोई आगे नहीं आया। दो छोटे-छोटे मासूम पिता के क्रियाकर्म के लिए लोगों के चेहरे को देख रहे थे। ऐसे में रामनगर पालिका के ईओ भरत त्रिपाठी सामने आये और युवक का अंतिम संस्कार कराया।
रामनगर में एक पिता की मौत के बाद उसके दो छोटे-छोटे बच्चे अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को देख रहे थे। पत्नी ने कई रिश्तेदारों को फोन किया। दरअसल एसडीएम विजयनाथ शुक्ल को खबर मिली तो उन्होंने नगर पालिका के ईओ भरत त्रिपाठी को इस काम का जिम्मा दिया। ऐसे में जब कोई मदद को आगे नहीं आया तो ईओ त्रिपाठी ने मृतक के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया। इस काम में उनका साथ देने के लिए पालिककर्मी, सभासद व एम्बुलेंस चालक दीपक चन्द्र, सभासद शिवि अग्रवाल भी शामिल हो गये। इसके बाद वह मृतक के शव को मोर्चरी से निकलवाकर उसे श्मशान घाट ले गये जहां उसका विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया।
हाल ही कोरोना से जंग जीतकर आये ईओ भरत त्रिपाठी ने इस नेक काम से सबका दिल जीत लिया। ईओ द्वारा मृतक का अंतिम संस्कार करने के बाद महिला और उसके बच्चों ने चैन की सांस ली। ईओ ने भी महिला और उसके बच्चों का दर्द समझा। कोरोना जैसी घातक बीमारी से कैसे लड़ा जा सकता है ये ईओ त्रिपाठी के अलावा और कौन जान सकता है। हर किसी की जुबान पर सिर्फ ईओ त्रिपाठी के जज्बे की चर्चाएं थी। ईओ त्रिपाठी ने युवक का अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश की।























