सोमेश्वर में अभी से बिछने लगी सियासी बिसात, कैबिनेट मंत्री के गढ़ में डॉ. अजय पाल की घेराबंदी

सोमेश्वर। उत्तराखंड की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सोमेश्वर विधानसभा सीट पर आगामी विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल अभी से बजता दिखाई दे रहा है। भाजपा और कांग्रेस के बीच संभावित सियासी समर की आहट से क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। एक तरफ जहां वर्तमान विधायक और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से डॉ. अजय पाल की लगातार बढ़ती सक्रियता ने इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
पिछले कुछ महीनों से डॉ. अजय पाल ने सोमेश्वर के ग्रामीण इलाकों में धुआंधार जनसंपर्क अभियान चला रखा है। वह लगातार चौपालों और बैठकों के जरिए स्थानीय निवासियों व कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद साध रहे हैं। उनके इस आक्रामक प्रचार से कांग्रेस संगठन में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि निचले स्तर (बूथ लेवल) पर संगठन को मजबूत किया जा रहा है और क्षेत्र के लोगों का समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
सोमेश्वर सीट से अतीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र बाराकोटी और पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा किस्मत आजमा चुके हैं। लेकिन इस बार डॉ. अजय पाल की अग्रिम दावेदारी और जमीनी सक्रियता दिख रही है। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता भी उनके नेतृत्व में ही आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, जिससे उनके टिकट की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है।
भाजपा के संगठनात्मक तंत्र और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के प्रभाव को भेदने के लिए कांग्रेस ने क्षेत्र के ज्वलंत मुद्दों को हथियार बनाया है। सोमेश्वर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं, सड़कों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा की बदहाली, पलायन, रोजगार और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर डॉ. अजय पाल लगातार आवाज उठा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोमेश्वर में उठाए जा रहे ये जनहित के मुद्दे और वंचित वर्ग से जुड़ी मांगें 2027 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
डॉ. अजय पाल की इस घेराबंदी ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में सोमेश्वर सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा और बेहद कांटे का मुकाबला देखने को मिलेगा।





















