बाल गीत: चिड़िया रानी, चिड़िया रानी…

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चिड़िया रानी, चिड़िया रानी ,
खाती दाना पीती पानी ।
तिनका तिनका जोड़ के लाती,
अपना नीड स्वयं बनाती ।
मेहनत से न तुम घबराती ,
सबको मेहनत का पाठ पढाती ।
देख तुम्हारा अनथक श्रम,
हैरत में पड़ जाते हम ।
सदा निडर बढ़ती हो आगे,
भला तुम्हें कोई कैसे बाँधे ।
हिल मिल रहते बन्धु तुम्हारे,
सदा चहकते साँझ सकारे।
हम सबको देती सदज्ञान ,
सदा समय का रखो ध्यान ।
उड़ती फिरती चाहे कहीं भी,
समय पे आ जाती निज धाम,
चिड़िया रानी,चिड़िया रानी,
मेरे घर आओ बन मेहमान ।।

डॉ. संज्ञा, बहराइच यूपी
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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।