कविताःबहुत कुछ कहना है…

खबर शेयर करें

बहुत कुछ कहना है,
बहुत कुछ है सुनना ।
कुछ रेखाओं सी बातें हैं,
कुछ हैं रिमझिम बरसतों सी।
कुछ बातें अति कठोर हैं,
कुछ नव पल्लव की कोपल सी।
कुछ मधुर सरस वीणा धुन सी हैं,
कुछ कड़वी कटुक निबोरी सी।
रात से काली कुछ बातें हैं,
कुछ दिनकर सी उजली सी।
कुछ खट्टी हैं, कुछ मीठी हैं ,
कुछ मिट गईं थी मैली सी ।
यादें हैं तेरी मेरी कुछ उजली कुछ धुंधली सी।
थोड़ी सी कट्टी थोड़ी सी मुच्ची,
बनी रहे हमारी दोस्ती में मस्ती।। लेखकः डॉ. संज्ञा

ADVERTISEMENTSAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।