देहरादून:(बड़ी खबर)-धामी कैबिनेट के बड़े फैसले, वीर उद्यमी योजना’ को मंजूरी, 16 प्रस्तावों पर मुहर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक तीन घंटे तक चली, जिसमें कुल 16 अहम प्रस्तावों पर चर्चा के बाद कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए ‘उत्तराखंड वीर उद्यमी योजना’ को मंजूरी दी गई, जिसे स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
नई योजना के तहत लाभार्थियों को 5% अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी, साथ ही एक ही परिवार के दो सैनिक भी इसका लाभ उठा सकेंगे। सरकार ने इसे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के पूरक के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे सैन्य पृष्ठभूमि वाले युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सके।
कैबिनेट ने किसानों के हित में वर्ष 2025 की गेहूं खरीद नीति को भी मंजूरी दी है। इसके तहत 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 2.2 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं, ई-व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए न्यायिक अधिकारियों को वाहन खरीद पर ब्याज में छूट देने का निर्णय लिया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर 4% और अन्य वाहनों पर 5% की ब्याज रियायत दी जाएगी।
वन विभाग में प्रशासनिक सुधार करते हुए मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पद के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 25 वर्ष से घटाकर 22 वर्ष कर दी गई है, जिससे पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली योजना के तहत 31 मार्च 2025 तक लगे कनेक्शनों को सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में कई अन्य अहम फैसले भी लिए गए। एडीबी के तहत ब्रिज इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट को मंजूरी, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के परिनियमों को स्वीकृति, होमगार्ड्स नियमावली में संशोधन और पुलिस को फॉरेंसिक व साइबर प्रशिक्षण देने जैसे कदम शामिल हैं।
युवाओं को राहत देते हुए भर्ती आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दी गई है, जो 2028 के बाद लागू होगी। वहीं, उपनिरीक्षक भर्ती में संशोधन कर अभ्यर्थियों को दोबारा मौका देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों के प्रमोशन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए मंत्री उपसमिति गठित की जाएगी।
इसके अलावा गेहूं और धान पर 2% मंडी शुल्क यथावत रखा गया है। स्वरोजगार योजनाओं में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को 10% आरक्षण देने का भी निर्णय लिया गया है, जबकि पति-पत्नी दोनों पात्र होने पर दोनों को योजना का लाभ मिलेगा।
कैबिनेट ने राज्य योजना आयोग के स्थान पर ‘सेतु आयोग’ के गठन को भी मंजूरी दी है और उसके ढांचे व कार्यक्षेत्र को स्वीकृति प्रदान की है। साथ ही, सरकारी संपत्ति वसूली अधिनियम-2025 को लागू करने के लिए नियमावली तैयार करने का रास्ता साफ किया गया है, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई संभव हो सकेगी।


















