बड़ी कृतज्ञ हूं मैं शब्दों की…

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बड़ी कृतज्ञ हूं मैं शब्दों की
जो नग्न तान्डव करते हैं,
पक्षपात रहित जो अन्तर्मन को झिंझोड़सीना ताने करते हैं मन की ।

जो देख रहे हैं नियति की उदासीनता
और तमाशबीन खामोश समाज,
मरी हुई मानवता के सीने में
उथल पुथल करती संवेदनहीनता ।

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इन शब्दों ने ही मजबूर किया
कलम उठा मैं कुछ बोलू
संवेदनहीन हृदयों में
भावनाओं के पट खोलू।

खोलना चाहती हूँ उनके मन के द्वार ,
हमें देखते ही जिनके सीनों में
वसनाओं के कीड़े रेंगते हैं ,
दुम हिलाते कुत्तों की तरह
टपकने लगती है मुख से ललचाती लार ।

अरे!सुनो दुरात्माओं
मेरा भी हृदय है,मन है,
मैं फूल की तरह खिलना चाहती हूँ,
पतंगों की तरह उड़ना चाहती हूँ,
बहारों से मिलना चाहती हूँ,
नजारों को परखना चाहती हूँ,

तुम्हारे साथ कदम से कदम मिलाने की तमन्ना है
फिर मेरे अधखिले बदन को ही
क्यों देना चाहते हो नोच ,
क्यों छीन लेते हो मुझसे
मेरे खिलखिलाने का हक ?
मेरी मासूमियत को रौदनेवाले
मेरे प्रश्नों पर क्यों लग जाते हैं
तुम्हारे विचारों पर मोच ?

डा. संज्ञा
बहराइच उत्तर प्रदेश।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।