क्यों उम्मीद लगा बैठे हो…

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दुनिया में हर कोई परेशान हुए बैठा है
मोहलत नहीं सोचने का जरा भी फिर भी
दिमाग पर बेवजह जोर दिए बैठा है
जरा संभल जा, वक्त बचा है थोड़ा अभी भी।

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सभी अपने हीं मन का मालिक बने बैठे हैं
बसेरा तो जमीं है, आसमां से उम्मीद लगा बैठे हैं
थोड़े दिनों का मेहमान है सभी इस जहां के
अपना घर तो खुदा अपने पास बना बैठे हैं।।

ये तेरा ये मेरा कब तक बैठे करते रहोगे
अपने हीं रूह को क्यों दागदार बना बैठे हो
ढूंढो कभी अपने लिए भी, फुर्सत के दो पल
इस तरह क्यों तुम, बहारों से दूर हुए बैठे हो।

निकलो कभी घर से, खूबसूरत नजारे झांक लो
कि एक मुद्दत से, क्यूं तुम खामोश हुए बैठे हो
जी लो हर वो पल, कुदरत ने जो तेरे लिए बख्शा है
कोई और जन्नत दिखाए, इस इंतजार में क्यों बैठे हो.!!

                                   पूनम झा,नई दिल्ली।
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