उत्तराखंडः हल्द्वानी में दिखेंगी पहाड़ की परंपरा, अब डोली में होगी दुल्हन की विदाई…

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Haldwani News: पहाड़ों में डोली पर दुल्हन की विदाई का रिवाज एक लंबे अर्से से चलता आ रहा है। कहते है बिन डोली बारात कैसी। आज भी पहाड़ों में दुल्हन डोली पर ही विदा होती है। कई जगह तो दुल्हन को डोली में विदा करने वालों का दक्षिणा भी दिया जाता है जो आज भी पहाड़ों में कायम है। लेकिन शहरों में दुल्हन कार में विदा होती है। ऐसे में पहाड़ों से आने वाले परिवारों के मन में अपनी बेटी को डोली में विदा करने की कसक रह जाती है। अगर हम कहें कि अब शहरों में भी दुल्हन डोली मंे विदा होगी तो आपको आश्चर्य होगा। लेकिन यह सच है। अब आपको हल्द्वानी शहर में विदाई के समय दुल्हन डोली में नजर आयेंगी। ऐसे में पहाड़ के उन परिवारों के लिए अच्छी खबर है जो अपनी बेटी को डोली में विदा करने की इच्छा रखते हैं। आइये जानते है हल्द्वानी में आपको कहां और कैसे उपलब्ध होगी दुल्हन की डोली। आगे पढ़िये…

बता दें कि हल्द्वानी ढहरिया के निवासी तारा सिंह जीना ने एक शानदार पहल की है। उन्होंने शहर में खुशियों की डोली का शुभारंभ किया है। उल्लेखनीय है कि कुमाऊंनी संस्कृति में डोली को काफी महत्व दिया गया है। प्राचीनकाल से ही डोली परंपरा कुमाऊं के विभिन्न गावों की पहचान रही है। किसी भी घर में बेटी की शादी हो और विदाई के लिए डोली का इस्तेमाल ना हो, यह अमूमन नहीं देखा जाता। आगे पढ़िये…

खैर, अब तो वैसे भी शहरों में पश्चिमी सभ्यता को अपनाने की अलग ही होड़ लगी हुई है। इसी बीच हल्द्वानी में डोली परंपरा की शुरुआत हुई है। टीएस जीना ने बताया कि पहाड़ की परंपरा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इसकी शुरुआत की गई है। अगर आप भी बेटी-बहन की शादी में डोली की व्यवस्था चाहते हैं तो 8868890888 पर संपर्क कर सकते हैं। टीएस जीना का कहना है कि उनके पास डेकोरेशन और बिना डेकोरेशन की डोलियां उपलब्ध हैं।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।