Rajasthan: तिजोरी में बंद पेपर बाहर कैसे आया? पायलट का गहलोत पर हमला, यह तो जादूगरी हो गई, ऐसा संभव नहीं…

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Jaipur News: बुधवार को पायलट ने बड़े अफसरों को रिटायरमेंट के बाद राजनीतिक नियुक्तियां देने पर भी गहलोत का नाम लिए बिना तीखा हमला बोला है। पेपर लीक मामले में अफसरों को क्लीन चिट देने के सीएम गहलोत के बयान पर पायलट ने कहा- जब बार-बार पेपर लीक होते हैं तो हमें दुख होता है। इसके लिए जिम्मेदारी तय करके एक्शन लेना होगा। अब कहा जा रहा है कि कोई अफसर जिम्मेदार नहीं है। पेपर तिजोरी में बंद होता है। तिजोरी में बंद पेपर बाहर बच्चों तक कैसे पहुंच गया। यह तो जादूगरी हो गई।

पायलट ने कहा- ऐसा संभव नहीं है कि कोई अफसर जिम्मेदार नहीं है। कोई न कोई तो जिम्मेदार होगा। पायलट झुंझुनूं जिले के गुढ़ा में किसान सम्मेलन में बोल रहे थे। झुंझुनूं में प्रेस वार्ता के दौरान सचिन पायलट ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा- मैंने कहा ये बहुत गम्भीर विषय है। पक्ष-विपक्ष जो भी हो, हमारे इतने सारे नौजवान हैं, उनका विश्वास व्यवस्था में कायम रहे ये सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।  लाखों बच्चे अगर अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते हैं या उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। वो सोचते हैं कि हम किस बेसिस पर विश्वास करें, वो बहुत बड़ा इश्यू है। वो सिर्फ एक व्यक्ति, पार्टी, सरकार की बात नहीं है। शिक्षित बेरोजगार की पीड़ा और ज्यादा है, उन्हें हम कैसे कॉन्फिडेंस देंगे कि रोजगार के अवसर पैदा होंगे यह बहुत बड़ा इश्यू है। हमेशा जो भी काम हो, पारदर्शिता से होना चाहिए और संतोष जनक होना चाहिए।

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सम्मेलन में बड़ी संख्या में रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स को राजनीतिक नियुक्तियां देने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा- बहुत से लोगों को राजनीतिक नियुक्तियां दी गईं। लेकिन जिन लोगों ने सरकार बनाने में खून पसीना बहाया है, उनका अनुपात सुधारने की जरूरत है। प्रदेश में बहुत से ऊंचे अधिकारी हैं, जो हमारी सरकार में काम करते हैं। लेकिन उन्हें फर्क नहीं पड़ता है कि कांग्रेस का राज है या बीजेपी का राज है। अफसर तो राज्य की नौकरी करते हैं। ऐसे बड़े अफसरों को मौका देना है तो भले ही दें, लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता का भी अनुपात बेहतर होना चाहिए। बड़े बड़े अफसर शाम 5 बजे रिटायर होते हैं तो रात 12 बजे उनकी नियुक्ति हो जाती है। लेकिन अफसरों की जगह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पद मिलते, तो वह अच्छा होता। हमें तो उसको ठीक करना होगा।

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संपादक - जीवन राज ईमेल - [email protected]

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