Health Tips: बदलते मौसम में गले में खराश, करें इन चीजों का सेवन

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Health Tips: बदलते मौसम में गले की खराश, सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं से राहत पाने के लिए औषधीय चाय एक बेहतरीन घरेलू उपाय है। अदरक, मुलेठी और दालचीनी जैसी चाय न केवल गले की खराश और खांसी में आराम देती है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है। गले की खराश और सर्दी-खांसी आमतौर पर बदलते मौसम, ठंडी हवा या वायरस इंफेक्शन के कारण होती है। कुछ आसान घरेलू उपाय और प्राकृतिक चीजें इन लक्षणों से राहत दिला सकते हैं:

  • तुलसी की चाय- तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण पाया जाता है। इसके पत्तों को पानी में उबालकर चाय बनाएं और पिएं। तुलसी गले की सूजन को कम करती है, इम्यून पावर को बढ़ाती है और खांसी को दूर करती है। इसे गर्म-गर्म ही दिन में दो बार पिएं।
  • हल्दी की चाय- हल्दी में कर्क्यूमिन पाया जाता है, जो एक प्रभावी एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट है। हल्दी पाउडर को पानी में उबालकर शहद के साथ पिएं। यह इन्फेक्शन को दूर करने में मदद करता है और गले की जलन और खांसी से राहत दिलाता है।
  • मुलेठी की चाय- मुलेठी का प्रयोग आयुर्वेद में खांसी और गले की सूजन के इलाज के लिए किया जाता है। इसका पाउडर पानी में उबालकर पिएं। यह गले की खराश को शांत करता है और सूखी खांसी में भी राहत देता है।
  • लौंग की चाय- एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर लौंग में यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है।यह खांसी में राहत देने के साथ-साथ गले की जलन को कम करने में सहायक है। इसे पानी में उबालकर सेवन करें।
  • पुदीना की चाय- पुदीना में मेन्थॉल पाया जाता है,जो सांस की नली को साफ करता है और कफ को बाहर निकालने में सहायक होता है। पुदीने के पत्तों को उबालकर इसका सेवन करें, यह खांसी और बंद नाक में तुरंत राहत देता है।
  • दालचीनी की चाय- दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो गले की खराश को कम करते हैं। दालचीनी के टुकड़े को पानी में उबालें और इसे हल्के गरम रूप में पिएं। इससे गले को आराम मिलता है और खांसी में राहत मिलती है।
  • अदरक की चाय- अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है, जो गले की सूजन को कम कर, बलगम निकालने में मदद करता है। इसलिए कद्दूकस किए हुए अदरक को पानी में उबालकर उसमें शहद मिलाकर पिएं। इससे खांसी में तुरंत आराम मिलेगा और गले की खराश भी कम होगी।
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इन चायों का सेवन दिन में 1-2 बार किया जा सकता है। इसके अलावा, शहद और नींबू को इन चायों में मिलाकर भी पी सकते हैं, जो संक्रमण के असर को और कम करने में सहायक हो सकता है।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।