Ahoi Ashtami 2022: अहोई अष्टमी पर बने रहे तीन शुभ योग, जानें व्रत का महत्‍व और पूजाविधि…

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2022 Ahoi Ashtami Date in India: करवा चौथ के बाद अहोई अष्टमी का व्रत आता है, जो कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखते हैं । इस साल अहोई अष्टमी व्रत 17 अक्टूबर दिन सोमवार को है ।   ज्योतिषाचार्य के अनुसार अहोई अष्टमी पर तीन शुभ योग बन रहे हैं, जिससे यह व्रत और भी शुभता प्रदान करने वाला हो गया है । अहोई अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं । ये तीनों ही योग शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं । आगे पढ़िए…

अहोई अष्टमी पर तीन शुभ योग

अहोई अष्टमी को शिव योग: 17 अक्टूबर, प्रात:काल से लेकर शाम 04 बजकर 02 मिनट तक
सिद्ध योग: शाम 04 बजकर 02 मिनट से अगले दिन शाम 04 बजकर 53 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: 18 अक्टूबर, प्रात: 05 बजकर 13 मिनट से प्रात: 06 बजकर 23 मिनट तक

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व्रत का महत्‍व

इस व्रत में चंद्रमा की बजाए तारों को अर्घ्‍य दिया जाता है। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार महिलाएं इस दिन शिव परिवार की पूजा करने के बाद तारों को अर्घ्‍य देती हैं। यह व्रत संतान की सलामती के लिए रखे जाने वाले व्रतों में सबसे प्रमुख है। ऐसी मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से आपकी संतान को जीवन में कोई कष्‍ट नहीं होता है और लंबी आयु की प्राप्ति होती है। आगे पढ़िए…

पूजाविधि

पुरानी मान्यताओं के अनुसार, अहोई पूजन के लिए शाम के समय घर की उत्तर दिशा की दीवार पर गेरू या पीली मिट्टी से आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास सेह तथा उसके बच्चों की आकृतियां बनाई जाती हैं और विधि पूर्वक स्नान, तिलक आदि के बाद खाने का भोग लगाया जाता है। समृद्ध परिवार इस दिन चांदी की अहोई बनवाकर भी पूजन करते हैं। इसी के साथ कुछ जगह चांदी की अहोई में दो मोती डालकर विशेष पूजा करने का भी विधान है।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।