सुनो! मेरे आगन्तुक

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सुनो!मेरे आगन्तुक
मेरे लिए तुम्हारा आगमन
ऐसे ही है जैसे
ह्रदय की दरारों से
फूट पड़ा हो
भावों का एक झरना
चाहे भीषण ताप हो
या कंपकंपाता शिशिर
या मेघों की उदारता
से बढ़ता जलस्तर
वसंत ऋतु में सुमनों की
सुगंध से सुगंधित हो घाटी
या पतझड़ से नीरव होती धरती
समय और मौसम की मार से
अछूता ही रहेगा
मेरे साथ भी
और मेरे बाद भी
तुम्हारे लिए काव्य रूपी
भावों की ये निर्झरिणी
युगान्त तक बहती ही रहेगी


रश्मि पोखरियाल, कारगी , उत्तराखंड

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।