फिल्म रिव्यू गढ़-कुमौ: सांस्कृतिक धरोहर और पहाड़ी जीवन का आईना, कुमाऊ-गढ़वाल के बीच रिश्तों का सच
Haldwani News: गढ़-कुमौ फिल्म देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे हम अपने मूल पहाड़ और उसकी संस्कृति से फिर से जुड़ रहे हों। इस फिल्म में अंकिता परिहार और संजू सिलोड़ी ने अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया है। कुमाऊंनी और गढ़वाली फिल्मों के बीच यह फिल्म एक खास जगह बनाती है। इसे देखकर हर पहाड़ी को अपने होने पर गर्व महसूस होगा।
फिल्म ने कुमाऊं और गढ़वाल के बीच वर्षों से जमी बर्फ को पिघलाने का काम किया है। इसकी कहानी भावनाओं से भरपूर है, जो कभी आपको रुलाती है, तो कभी पहाड़ की यादों और पुराने किस्सों के जरिए हंसा देती है। यह फिल्म न केवल हमें अपनी जड़ों की ओर खींचती है, बल्कि अपनी बोली और भाषा को बचाने की जिम्मेदारी का एहसास भी कराती है।
फिल्म का निर्देशन अनुज जोशी ने किया है, जो बेमिसाल है। उन्होंने कुमाऊं-गढ़वाल के बीच रिश्तों और संस्कृति पर आधारित एक ऐसी कहानी बुनी है, जो दिल को छू लेती है। फिल्म हमें अपने परिवार और बच्चों को दिखानी चाहिए, खासकर उन्हें जो धीरे-धीरे अपनी मातृभाषा और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं।
हल्द्वानी के वॉकवे मॉल में प्रदर्शित हो रही इस फिल्म को देखने के बाद आपको यकीन होगा कि यह वाकई पहाड़ की खूबसूरती और संस्कृति को पर्दे पर जीवंत कर देती है। यह फिल्म हर पहाड़ी के दिल में एक खास जगह बना लेगी। गढ़-कुमौ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पहाड़ी जीवन का आईना है। इसे देखकर आप भावुक भी होंगे और गर्व भी महसूस करेंगे। तो इसे देखने का मौका न गंवाएं और अपने बच्चों को भी दिखाएं।