क्या होगा कल नहीं जानती…

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क्या होगा कल नहीं जानती,
क्या बदले किस पल नहीं जानती ।
सच कहूँ कोई शिकायत नहीं है,
सच कहूँ दुश्मन भी कोई नहीं है ।
हाथ जोड़ करबद्ध प्रार्थना करती हूँ,
दिन रात प्रभु से यही वन्दना करती हूँ ।
मिटा दे वसुधा से सब तम,
हैं एक सदा रहें एक ही हम ।
गाएँ जीवन के सरगम,
प्रेम सदा बरसाएँ हम ।
प्रसन्न सदा हों धरती अम्बर,
मिटे द्वेष मित्थ्या आडम्बर ।
हम जीवन का आनंद उठाएँ,
बहें सुरीली मंद हवाएँ ।
बहे स्नेह सरिता जगती पर ,
आशीष प्रभु का हो बस हमपर ।
कभी क्रोध न हमको आए ,
चाह यही है मिलें दुआएँ ।
डॉ संज्ञा प्रगाथ

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।