उत्तराखंड: पिता तोड़ते है पत्थर, आपदा में टूट चुका मकान, वायरल बॉय प्रदीप के संघर्ष की कहानी…

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CHOUKHUTIYA NEWS: सोशल मीडिया में सनसनी बना प्रदीप मेहरा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया ब्लॉक के धनाड़ गांव का है। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रदीप मेहरा की मां पिछले 2 सालों से बीमार है और पिछले 1 साल से वह दिल्ली के नागलोई में अपनी बहन के घर आ गई थी, जहां वह रह कर अपना इलाज करा रही है।

प्रदीप मेहरा और उनसे 2 साल बड़ा भाई पंकज मेहरा दोनों एक निजी कंपनी में काम करके अपने परिवार का किसी तरह भरण पोषण करते हैं और उधर गांव में प्रदीप के पिता त्रिलोक सिंह मेहरा खेती-बाड़ी करते हैं घर में फोन की तक सुविधा नहीं है। गरीबी का आलम यह है कि प्रदीप का पैतृक आवास आपदा में गिर गया अब वहां कोई नहीं रहता वर्तमान में वह इंदिरा आवास में बने एक मकान में रहते हैं। यही नहीं प्रदीप के पिता को यह तक नहीं पता कि उनका बेटा पूरे देश में वायरल हो रहा है और सेना में भर्ती होने के प्रति उसके जज्बे को लोग सलाम कर रहे हैं।

प्रदीप के गांव में भी महज आठ बाई बारह फीट का एक छोटा कमरा है परिवार के सभी लोग इसी कमरे में रहने को मजबूर हैं हालांकि इन दिनों घर पर पिता त्रिलोक सिंह ही रहते हैं। इसी कमरे के निकट दूसरे के खेत में बनाई गई एक रसोई है जिसमें लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनता है।प्रदीप के पिता त्रिलोकसिंह नदी किनारे बैठकर मेहनत मजदूरी और कंकड़ तोड़कर गुजारा करते हैं। सरकारी स्तर पर कोई मजदूरी पर लगाने को तैयार नही है लोग ताना कसते हैं। रात बिताने लायक बना छोटा सा कमरा सरकारी स्तर के साथ साथ कुछ लोगों की मदद से बना है।परिवार की माली हालत बहुत खराब है। परिवार के पास कुछ भी नही है। जमीन पहले से ही नही थी जबकि मां की बीमारी के बाद मवेशियों को भी बेचना पड़ा है।

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12वीं के बाद प्रदीप के माता-पिता उन्हें नहीं पड़ा पाए] लिहाजा वह दिल्ली में रहकर प्राइवेट कंपनी में काम करते हुए अपने सपने पूरे करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 3 दिन पहले रात को 11:00 बजे ड्यूटी की शिफ्ट छोड़ने के बाद प्रदीप मेहरा नोएडा सेक्टर 16 से अपने कमरे यानी 10 किलोमीटर तक की दौड़ लगाते हुए जा रहे थे कि इस बीच फिल्म निर्माता और वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी को प्रदीप सड़क पर दौड़ते दिखाई दिए।

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जब चलते-चलते विनोद कापड़ी ने प्रदीप से पूछा कि वह दौड़ क्यों रहे हैं तो प्रदीप ने बताया कि सेना में भर्ती होने के लिए वह रोज रात को 11:00 बजे स्विफ्ट छूटने के बाद 10 किलोमीटर दूर अपने घर तक यूं ही दौड़ते हुए जाते हैं। और विनोद कापड़ी द्वारा दौड़ते दौड़ते प्रदीप से बात करते हुए बनाया गया वीडियो पूरे देश में वायरल हो गया अब तक कई मिलियन लोग उस वीडियो को देख चुके हैं और पूरे देश भर से प्रदीप के लिए लोग उसके संघर्ष के जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।