श्रद्धांजलि: कैसे हरिकिशन गिरि गोस्वामी से अभिनेता बने मनोज कुमार

मनोज कुमार, जिनका असली नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी था, भारतीय सिनेमा के एक प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और लेखक थे। वे 1960 से 1980 के दशक के बीच हिंदी फिल्मों के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक थे। देशभक्ति पर आधारित फिल्मों में उनके अभूतपूर्व योगदान के कारण उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना जाता है।
उनका जन्म 24 जुलाई 1937 को वर्तमान पाकिस्तान के अब्बोटाबाद में हुआ था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और दिल्ली में बस गया। मनोज कुमार का झुकाव शुरू से ही अभिनय और सिनेमा की ओर था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में फिल्मी दुनिया में कदम रखा।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1957 में फिल्म फैशन से की, लेकिन उन्हें असली पहचान मिली 1962 की फिल्म शहीद से, जिसमें उन्होंने भगत सिंह की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने हरियाली और रास्ता, हिमालय की गोद में, वो कौन थी, और पत्थर के सनम जैसी कई हिट फिल्मों में अभिनय किया।
मनोज कुमार ने न केवल अभिनय किया, बल्कि उन्होंने निर्देशन और पटकथा लेखन में भी हाथ आजमाया। उनकी फिल्म उपकार (1967) एक ऐतिहासिक हिट साबित हुई, जिसमें उन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को फिल्मी परदे पर उतारा। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
उनकी अन्य प्रमुख देशभक्ति फिल्मों में पूरब और पश्चिम (1970), रोटी कपड़ा और मकान (1974), और क्रांति (1981) शामिल हैं।
मनोज कुमार को 1992 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया। 2016 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया।
मनोज कुमार का निधन 4अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में हुआ। वे 86 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। देशभक्ति को सिनेमा के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने वाले इस महान कलाकार को हमेशा याद किया जाएगा।
मनोज कुमार भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति जागरूक भी किया।











