Happy Father’s day 2021: पिता वृक्ष की छाँव…

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पिता वृक्ष की छाँव,
पिता प्रीत का गाँव ।
दिल दरिया सा निर्मल,
पर शख्त नियम के पाँव।
हिमगिरि सा है तटस्थ सदा,
सहे सब विघ्नों के दाँव।
हम सब उनकी आँखों के तारे,
वह भव पार उतारना नाव।
उनकी छाती पर हम कूदे,
कैसे मैं ये बिसराऊँ।
हाथी घोड़े थे वो अपने,
कैसे भूल ये जाऊँ ।
उंगली पकड़ चलना सिखलाया,
अक्षर क्रम का ज्ञान कराया ।
पुरुषार्थ चतुष्टय बतलाए,
मानवता का पाठ पढ़ाया।
हौसलों की भी उड़ान दी,
नभ को छूना सिखलाया ।
कैसे कैसे कष्ट सहे पर,
कुछ हमको न बतलाया।
कृष्ण से बने सदा सारथी,
विजय पथ की ओर बढ़ाया ।
वे हमारे झुमरी तलैया,
उनकी छाया में सुख पाऊँ ।
भगवान सरीखे पिता हमारे,
बारम्बार पाँव छू आऊँ ।
गले लगाते आज भी हँसकर,
चंदन से सिर माथ चढ़ाऊँ।।
डा संज्ञा ‘प्रगाथ

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।