हल्द्वानी: बेबी मेहर कौर ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, एक वर्ष 7 माह की आयु में रचा इतिहास

हल्द्वानी। शहर और प्रदेश के लिए गर्व का क्षण तब आया जब हल्द्वानी की नन्ही प्रतिभा मेहर कौर का नाम आधिकारिक रूप से World Book of Records में दर्ज किया गया। महज़ 1 वर्ष 7 माह की आयु में 25 सामान्य ज्ञान (General Knowledge) प्रश्नों के सही उत्तर देकर मेहर ने असाधारण बुद्धिमत्ता, अद्भुत स्मरण शक्ति और उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता का परिचय दिया।

इतनी कम उम्र में इस प्रकार की उपलब्धि को अभूतपूर्व माना जा रहा है। उपलब्ध रिकॉर्ड प्लेटफॉर्म और सूचनाओं के अनुसार, 1 वर्ष 7 माह से कम आयु के किसी बच्चे द्वारा इस तरह की उपलब्धि का कोई पूर्व प्रलेखित उदाहरण सामने नहीं आया है। इससे मेहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सराहना मिली है।
मेहर कौर, डॉ. हरलीन कौर और डॉ. गुर्रौनक सिंह की सुपुत्री हैं। उनके माता-पिता ने इस सम्मान पर प्रसन्नता और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए बताया कि मेहर ने बहुत कम उम्र से ही तीव्र अवलोकन क्षमता और शीघ्र सीखने की अद्भुत प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। परिवार का सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण उसकी इस उपलब्धि की आधारशिला बना।
इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए Santosh Shukla, सीईओ, World Book of Records, ने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि उचित मार्गदर्शन और अनुकूल वातावरण मिलने पर बच्चों की क्षमता असीमित होती है।
ब्रिटेन की Labour Party के वरिष्ठ नेता एवं पाँच बार सांसद रह चुके Virendra Sharma ने भी मेहर को शुभकामनाएँ देते हुए इसे भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी गर्व का विषय बताया।
वहीं, ज्यूरिख (स्विट्ज़रलैंड) स्थित वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के संरक्षक विल्हेम जेज़लर और पूनम जेज़लर ने भी मेहर को उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया।
मेहर को आधिकारिक प्रमाणपत्र 9 फरवरी 2026 को Indore में आयोजित “World Book of Records Summit & Awards” समारोह में प्रदान किया गया।
हल्द्वानी सहित पूरे उत्तराखंड में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह और गर्व का माहौल है। मेहर कौर की यह सफलता इस तथ्य को प्रमाणित करती है कि उम्र कभी भी उत्कृष्टता की बाधा नहीं होती। उचित प्रोत्साहन, स्नेह और सकारात्मक वातावरण मिलने पर बच्चे असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं।
नन्ही मेहर की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल हल्द्वानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रही है, बल्कि अभिभावकों और बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई है।



















