उत्तराखंडः (बड़ी खबर)- दिल्ली तिहाड़ जेल से उत्तराखंड के इस जेल में शिफ्ट हुआ कुख्यात सुनील राठी…

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Haridwar News: कुख्यात राठी के हरिद्वार जेल में शिफ्ट करने के बाद जेल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जेल प्रशासन की ओर से राठी को दूसरी जेल में शिफ्ट करने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। कुख्यात सुनील राठी को दिल्ली तिहाड़ जेल से हरिद्वार जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। बदमाश राठी के हरिद्वार जेल शिफ्ट होने के बाद जेल के अधिकारी परेशान हैं। कई साल पहले उत्तराखंड की जेल से कुख्यात सुनील राठी को उत्तर प्रदेश की जेल में शिफ्ट किया गया था। 2018 तक राठी बागपत जेल में बंद था। 2018 में अंसारी गैंग के बदमाश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के माफिया डॉन प्रेमप्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की जेल के अंदर ही गोलियों से छलनी कर हत्या की गई थी। जिस दिन मुन्ना बजरंगी को जेल में शिफ्ट किया गया था उसी दिन उसकी हत्या कर दी थी। आगे पढ़िये…

मुन्ना बजरंगी की हत्या करने का इल्जाम खुद किया था कबूल

वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने बताया कि शनिवार की शाम सुनील राठी को दिल्ली पुलिस ने जेल में शिफ्ट कराया है। राठी को दूसरी जेल में शिफ्ट करने को लेकर आला अधिकारियों से पत्राचार किया है।  कुख्यात सुनील राठी ने मुन्ना बजरंगी की हत्या करने का इल्जाम खुद कबूल किया था। इसके बाद राठी को बागपत से दूसरी जेल में शिफ्ट किया गया। फिर दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। इसके बाद से तिहाड़ जेल में ही था। शनिवार की शाम को अचानक दिल्ली पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीन गाड़ियों में राठी को लेकर हरिद्वार पहुंची। कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जिला कारागार रोशनाबाद में राठी को शिफ्ट कर दिया।  आगे पढ़िये…

यूपी-उत्तराखंड का डॉन कहा गया। इस डॉन का नाम सुनील राठी है। ये वही सुनील राठी है, जिस पर एक अन्य कुख्यात मुन्ना बजरंगी को जेल के अंदर गोली मारने का आरोप है। पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के अपराध जगत में सुनील राठी का अपना दबदबा है। बागपत के रहने वाले सुनील राठी के पिता नरेश राठी राजनीति में थे और नगर पंचायत टिकरी के चेयरमैन थे। पारिवारिक रंजिश के चलते साल 1999 में नरेश राठी की हत्या कर दी गई। पिता की हत्या के बाद सुनील राठी ने जुर्म की दुनिया में पहला कदम रखा और गैंग बनाकर साल भर के अंदर ही 4 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस हत्याकांड के बाद सुनील बागपत से फरार हो गया। बागपत से जाने के बाद उसने दिल्ली में कुछ वारदातों को अंजाम दिया और फिर हरिद्वार चला गया। आगे पढ़िये…

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हरिद्वार में रहने के दौरान उसने अपना नेटवर्क बड़ा कर लिया। जहां एक तरफ प्रशासनिक अमला दो राज्यों के अलग होने में व्यस्त था तो वहीं दूसरी तरफ सुनील राठी गैंग के काम को चारों तरफ फैलाने में व्यस्त रहा, लेकिन 2000 में उसे हत्याओं के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। जेल जाने के बाद सुनील राठी की नजर अब जमीन और रंगदारी की ओर थी, जेल में बैठे-बैठे ही गुर्गों की मदद से उसने कई सारी जमीनों पर कब्ज़ा कर लिया। आगे पढ़िये…

सुनील पर साल 2011 में रुड़की जेल में जेलर की हत्या का आरोप भी लगा था। सुनील राठी जब से गिरफ्तार हुआ, तब से केवल उसकी जेलें बदली गई। वह खुद कभी जेल से बाहर नहीं आया, लेकिन उसकी मां बागपत की टिकरी से चेयरमैन भी रह चुकी हैं। इसके अलावा वह अपने रसूख के दम पर मां राजबाला को छपरौली विधानसभा से चुनाव भी लड़वा चुका है। आगे पढ़िये…

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सुनील की मां राजबाला चौधरी व परिवार के अन्य लोगों पर भी दिल्ली, मेरठ, बागपत और हरिद्वार में हत्या, हत्या की साजिश, रंगदारी, अपहरण समेत कई मामलों में केस दर्ज है। हालांकि उसकी मां भी 2017 में एक बार गिरफ्तार हुई थी, जब सुनील ने जेल के अंदर से ही रुड़की के मशहूर डॉक्टर से 50 लाख की रंगदारी मांगी थी। इस मामले में राठी ने डॉक्टर से कहा था कि वह इन पैसों को उनकी मां तक पहुंचा दे। आगे पढ़िये…

सुनील राठी जब रुड़की जेल में बंद था तो उसने अपनी जान को खतरा बताया था, जिसके बाद उसे बागपत जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। इसी दौरान सुनील राठी का नाम उस समय चर्चा में आया, जब 9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में बंद कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।