अल्मोड़ा: 30 साल बाद घर लौटा लापता महिपाल, निहारती रही पत्नी के आंखों से बहते रहे आंसू

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Almora News: अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे विकासखंड के एक छोटे से गांव चक केलानी में उस समय भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब 30 साल के लंबे इंतज़ार के बाद एक बिछड़ा पति अपने घर लौटा। यह सिर्फ मिलन नहीं था, बल्कि धैर्य, त्याग और अटूट विश्वास की ऐसी कहानी थी, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

साल 1995 जब महिपाल सिंह रजवार अपनी ढाई महीने की मासूम बेटी, पत्नी मीना देवी और परिवार को छोड़कर रोजगार की तलाश में दिल्ली चले गए थे। उस दिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह जुदाई तीन दशक लंबी हो जाएगी। परिवार इंतज़ार करता रहा, लेकिन समय बीतता गया और महिपाल का कोई पता नहीं चला।

इधर, गांव में मीना देवी ने अकेले ही जिंदगी की कठिन राहों को पार किया। समाज के ताने, आर्थिक चुनौतियां और अकेलेपन का दर्द, सब कुछ सहते हुए उन्होंने अपने कर्तव्यों को निभाया। उन्होंने न केवल अपनी बेटी का पालन-पोषण किया, बल्कि अपने पतिव्रता धर्म को भी पूरी निष्ठा के साथ निभाया। उनका जीवन मानो त्याग और समर्पण की मिसाल बन गया।

आखिरकार 30 साल बाद वह दिन आया, जब महिपाल सकुशल घर लौटे। जैसे ही मीना देवी ने अपने पति को देखा, उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गला रुंध गया, शब्द साथ छोड़ गए सिर्फ भावनाएं ही बोल रही थीं। महिपाल भी खामोश खड़े रहे, शायद अपने वर्षों के फैसले और दूरी का अहसास उन्हें भीतर तक झकझोर चुका था।

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इस अनोखे मिलन को देखने के लिए गांव में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई इस भावुक पल का साक्षी बनना चाहता था। यह दृश्य ऐसा था, जिसे देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। मीना देवी की यह कहानी त्रेता युग की माता सीता की याद दिलाती है, जिन्होंने कठिन वनवास में भी अपने धर्म और विश्वास को नहीं छोड़ा। उसी तरह मीना ने भी विपरीत परिस्थितियों में अपने विश्वास को जिंदा रखा।

महिपाल के छोटे भाई हरीश रजवार, जो पेशे से शिक्षक हैं, ने हार नहीं मानी और वर्षों तक अपने भाई की तलाश जारी रखी। आखिरकार सोशल मीडिया के जरिए उन्हें सफलता मिली। फेसबुक पर एक प्रोफाइल के माध्यम से महिपाल का पता चला और बातचीत के बाद वह घर लौट आए।

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महिपाल ने बताया कि उन्होंने आत्म कल्याण के लिए बैराग धारण कर लिया था और एक अखाड़े में सेवा कर रहे थे। लेकिन नियति ने आखिरकार उन्हें अपने परिवार से मिला ही दिया। यह कहानी सिर्फ एक परिवार के मिलन की नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की है, जो समय की हर परीक्षा में खरा उतरा। मीना देवी आज समाज के लिए एक प्रेरणा हैं जो सिखाती हैं कि सच्चा प्रेम और धैर्य कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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पहाड़ प्रभात डैस्क

समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्‍पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।