मैं एक पहाड़न कल कल करते झरने खेलें गोद में मेरी नदियाँ उमड़ी कि जैसे कोई बंजारन ! मैं एक पहाड़न ! धानी चुनरी में मेरी जीवन पल्लवित है वन वृक्ष लताद्रुम खग और विहग है आखेटक आक्रांतक भय को देती अभयारण्य ! मैं एक पहाड़न ! वक्षस्थल पर मेरे ममता बिखरी है उन्नत ललाट पर स्वर्णिम आभा निखरी है ! पिहू पिहू करते पपीहे की ज्यूँ प्यासी चितवन ! मैं एक पहाड़न ! मृदु मनु मनुहार मैं लाड लडाती सुने हुए घर आँगन मैं पथिक बुलाती ! रूप सुंदरी मैं हाय ! फिर भी क्यूँ अभागन ? मैं एक पहाड़न ! गीतांजलि मृदुल, देहरादून
समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री के साथ (MAJMC) पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर की डिग्री। पत्रकारिता में 15 वर्ष का अनुभव। अमर उजाला, वसुन्धरादीप सांध्य दैनिक में सेवाएं दीं। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। राजनीतिक और सांस्कृतिक के साथ खोजी खबरों में खास दिलचस्पी। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ट्रेंडिंग कंटेंट को वायरल बनाने के साथ-साथ राजनीति और उत्तराखंड की संस्कृति पर लिखने में विशेषज्ञता हासिल की है। वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर ही नहीं, बल्कि एक ऐसे शख्स हैं जो हमेशा कुछ नया सीखने और ख़ुद को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहते हैं। देश के कई प्रसिद्ध मैगजीनों में कविताएं और कहानियां लिखने के साथ ही वह कुमांऊनी गीतकार भी हैं अभी तक उनके लिखे गीतों को कुमांऊ के कई लोकगायक अपनी आवाज दे चुके है। फुर्सत के समय में उन्हें संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और फोटोग्राफी पसंद है। वर्तमान में पहाड़ प्रभात डॉट कॉम न्यूज पोर्टल और पहाड़ प्रभात समाचार पत्र के एडिटर इन चीफ है।